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धान का कटोरा चंदौली में 2027 का सियासी घमासान: जानिए सर्वे

🎙️ ग्राउंड रिपोर्ट: धान की लहलहाती फसलें, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन की हलचल और चंदौली की 4 सीटों का चुनावी मिजाज! वाराणसी (काशी) की सरहद से सटा, महान क्रांतिकारी बाबा की माटी और 'धान का कटोरा' कहा जाने वाला चंदौली (Chandauli) जिला पूर्वांचल की राजनीति में बहुत बड़ी हैसियत रखता है। बिहार बॉर्डर से सटी इस जिले की राजनीति केवल नारों पर नहीं, बल्कि मौर्य/कुशवाहा, यादव, क्षत्रिय (ठाकुर), मौर्या, बिंद/मल्लाह, वैश्य, ब्राह्मण और दलित (जाटव/सोनकर) मतदाताओं के जातीय गठजोड़ पर घूमती है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चंदौली जिले की 4 सीटों पर 3-1 का ज़बरदस्त मुकाबला देखने को मिला था। मुगलसराय (380) से रमेश जायसवाल, सैयदराजा (382) से सुशील सिंह और चकिया आरक्षित (383) सीट से कैलाश खरवार ने जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का परचम फहराया था। वहीं सकलडीहा (381) सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) के प्रभुनारायण सिंह यादव ने जीत दर्ज कर अपनी साख बचाई थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में चंदौली सीट पर सपा की ऐतिहासिक जीत के बाद 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद आक्रामक मोड़ ले चुका है...

अमरोहा ढोलक उद्योग का दर्द, हसनपुर में जाट-सैनी दांव और नौगावां सादात में कांटे का मुकाबला !

🥁 अमरोहा डायरी: लकड़ी के कलात्मक हुनर, गंगा का दियारा और 4 सीटों पर 2027 का सियासी घमासान! दुनिया भर में अपने प्रसिद्ध ढोलक (Dholak Industry) व वाद्य यंत्रों के निर्माण और आम की मीठी मिठास के लिए मशहूर अमरोहा (ज्योतिबा फुले नगर) जिला रुहेलखंड और पश्चिमी यूपी की राजनीति में एक बेहद संवेदनशील व महत्वपूर्ण धुरी है। मुरादाबाद मंडल में आने वाला यह जिला मुस्लिम, जाट, सैनी (ओबीसी), चौहान-राजपूत, वैश्य और दलित (जाटव) समाज की मजबूत आबादी से सजा हुआ है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में अमरोहा की 4 सीटों पर बेहद कड़ा मुकाबला देखने को मिला था। अमरोहा सदर (41) और नौगावां सादात (40) सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) ने परचम फहराया था, जबकि हसनपुर (42) और मंडी धनौरा आरक्षित (39) सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जीत हासिल की थी। यानी 2022 का जनादेश 2-2 की बराबरी पर छूटा था। 2024 के लोकसभा नतीजों के बाद अब रालोद और भाजपा के एनडीए (NDA) गठबंधन के साथ आने से हसनपुर और धनौरा बेल्ट का गणित पूरी तरह नया रूप ले चुका है। क्या सपा अपने दोनों गढ़ बचा पाएगी या भाजपा 2027 में बढ़त बनाएगी? आइए, चारों सीटो...