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कालीन नगरी भदोही में 2027 की जंग: कौन फहराएगा परचम ?

🎙️ विंध्याचल ग्राउंड एक्स-रे: कालीन नगरी का हुनर, बुनकरों की टीस और भदोही जिले की तीन सीटों पर 2027 का महासंग्राम! 'कार्पेट सिटी' (Carpet City) के नाम से दुनिया भर में भारत का नाम रोशन करने वाला भदोही (Bhadohi - संत रविदास नगर) जिला केवल अपने हाथ से बुने कालीनों के लिए ही नहीं, बल्कि विंध्याचल अंचल की बेहद तीखी और बाहुबल-प्रभावित राजनीति के लिए जाना जाता है। ब्राह्मण, बिंद/निषाद, मुस्लिम, यादव, मौर्य/शाक्य और दलित (जाटव) मतदाताओं का यह क्षेत्र हर चुनाव में चौंकाने वाले जनादेश देने के लिए मशहूर है। 2022 के विधानसभा चुनाव में भदोही जिले की तीनों सीटों पर बहुत ही दिलचस्प और बंटा हुआ जनादेश आया था। भदोही सदर (392) सीट पर समाजवादी पार्टी के जाहिद बेग ने परचम लहराया, ज्ञानपुर (393) सीट पर बाहुबली विजय मिश्रा के लंबे वर्चस्व को तोड़ते हुए निषाद पार्टी (BJP गठबंधन) के विपुल दुबे ने जीत दर्ज की, जबकि औराई आरक्षित (394) सीट पर भारतीय जनता पार्टी के दीनानाथ भास्कर ने कमल खिलाया था। 2024 के लोकसभा चुनावों में टीएमसी (सपा गठबंधन) के ललितेश पति त्रिपाठी और भाजपा के डॉ. विनोद बिंद के बीच...

खलीलाबाद से धनघटा तक किसका चलेगा जादू ? 2027 ओपिनियन पोल !

🎙️ पूर्वांचल ग्राउंड रिपोर्ट: सूफी संत कबीर की निर्वाण स्थली मघर, घाघरा-राप्ती का कटान और संत कबीर नगर की तीन सीटों का चुनावी समीकरण! महान सूफी संत कबीरदास की पावन तपोभूमि मघर, बखिरा पक्षी अभ्यारण्य और पीतल-बर्तन उद्योग के लिए मशहूर संत कबीर नगर (Sant Kabir Nagar) जिला पूर्वांचल की राजनीति में अपना खास वजूद रखता है। बस्ती मंडल का हिस्सा रहा यह जिला ब्राह्मण, मुस्लिम, निषाद/मल्लाह, यादव, वैश्य और दलित (जाटव/बेलदार) मतदाताओं के पेचीदा सामाजिक समीकरणों के लिए जाना जाता है। 2022 के विधानसभा चुनाव में संत कबीर नगर जिले की तीनों सीटों पर रोचक परिणाम देखने को मिले थे। खलीलाबाद (313) सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के अंकुर राज तिवारी ने परचम लहराया, मेहदावल (312) सीट निषाद पार्टी (BJP गठबंधन) के अनिल कुमार त्रिपाठी के पाले में गई, तो वहीं धनघटा आरक्षित (314) सीट पर भाजपा के गणेश चंद्र ने जीत दर्ज की थी। 2024 के लोकसभा चुनावों में पूरे पूर्वांचल बेल्ट में समाजवादी पार्टी के 'PDA' कार्ड के चले जादू और पीस पार्टी/बसपा के मुस्लिम वोटों में बिखराव के बाद अब 2027 की लड़ाई बेहद आक्रामक ...

बुंदेलखंड के प्रवेश द्वार जालौन में 2027 की बिसात: कालपी में निषाद-मुस्लिम दांव, माधोगढ़ का क्षत्रिय-ब्राह्मण गणित और उरई SC सीट पर घमासान! जानिए सर्वे !

🎙️ चौपाल एनालिसिस: ऐतिहासिक कालपी का किला, पचनद का संगम और जालौन जिले की तीन सीटों पर 2027 का सियासी समर! बुंदेलखंड का प्रवेश द्वार माना जाने वाला जालौन (Jalaun) जिला न केवल झांसी मंडल की राजनीति की धुरी है, बल्कि महर्षि वेदव्यास की जन्मभूमि कालपी और ऐतिहासिक पचनद (पाँच नदियों के संगम) के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। बीहड़ और कछारी इलाकों से घिरे जालौन जिले का राजनीतिक मिजाज हमेशा से क्षत्रिय, ब्राह्मण, निषाद/मल्लाह, कुर्मियों (सचान/चौधरी), पाल/बघेल और दलित (जाटव/कोरी) वोट बैंक के इर्द-गिर्द घूमता रहा है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में जालौन जिले की 3 सीटों पर बेहद दिलचस्प जंग देखने को मिली थी। माधोगढ़ (219) और उरई आरक्षित (221) सीट पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड जीत हासिल की थी, जबकि ऐतिहासिक सीट कालपी (220) पर समाजवादी पार्टी (SP) के विनोद चतुर्वेदी ने परचम फहराया था। 2024 के लोकसभा चुनावों में बुंदेलखंड में 'PDA' समीकरण की गूंज के बाद अब 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जालौन की चौपालों पर चुनावी चर्चाओं का पारा हाई हो चुका है। आइए, तीनों सीटों का निष्पक...