🎙️ ग्राउंड रिपोर्ट: धान की लहलहाती फसलें, पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन की हलचल और चंदौली की 4 सीटों का चुनावी मिजाज! वाराणसी (काशी) की सरहद से सटा, महान क्रांतिकारी बाबा की माटी और 'धान का कटोरा' कहा जाने वाला चंदौली (Chandauli) जिला पूर्वांचल की राजनीति में बहुत बड़ी हैसियत रखता है। बिहार बॉर्डर से सटी इस जिले की राजनीति केवल नारों पर नहीं, बल्कि मौर्य/कुशवाहा, यादव, क्षत्रिय (ठाकुर), मौर्या, बिंद/मल्लाह, वैश्य, ब्राह्मण और दलित (जाटव/सोनकर) मतदाताओं के जातीय गठजोड़ पर घूमती है। 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में चंदौली जिले की 4 सीटों पर 3-1 का ज़बरदस्त मुकाबला देखने को मिला था। मुगलसराय (380) से रमेश जायसवाल, सैयदराजा (382) से सुशील सिंह और चकिया आरक्षित (383) सीट से कैलाश खरवार ने जीत दर्ज कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का परचम फहराया था। वहीं सकलडीहा (381) सीट पर समाजवादी पार्टी (SP) के प्रभुनारायण सिंह यादव ने जीत दर्ज कर अपनी साख बचाई थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में चंदौली सीट पर सपा की ऐतिहासिक जीत के बाद 2027 का विधानसभा चुनाव बेहद आक्रामक मोड़ ले चुका है...