चारमीनार की छांव से निकलकर रुहेलखंड और पूर्वांचल की गलियों तक: जब एक सांसद ने उत्तर प्रदेश की पारंपरिक 'वोट बैंक' राजनीति को सीधी चुनौती दी नमस्कार साथियों! बिंदास पोल (Bindaas Poll) की क्षेत्रीय दल महा-श्रृंखला में आपका स्वागत है। सुभासपा, अपना दल, रालोद, निषाद पार्टी और आज़ाद समाज पार्टी के बाद आज हम उस राजनीतिक दल का इतिहास और ज़मीनी हक़ीक़त टटोल रहे हैं जिसकी एंट्री ने उत्तर प्रदेश की सियासत में सबसे ज्यादा बहसों को जन्म दिया है— ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) और इसके राष्ट्रीय अध्यक्ष बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी । उत्तर प्रदेश में मुस्लिम आबादी लगभग 19% से 20% है। दशकों से यह माना जाता रहा कि यह वर्ग कांग्रेस, समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी के बीच ही अपनी चुनावी तकदीर तलाशता है। लेकिन 2014 के बाद हैदराबाद से चलकर उत्तर प्रदेश पहुंचे असदुद्दीन ओवैसी ने एक नया राजनीतिक विमर्श खड़ा किया: "आप कब तक दूसरों को जिताने के लिए वोट देंगे? अपना खुद का सियासी नेतृत्व कब खड़ा करेंगे?" क्या ओवैसी उत्तर प्रदेश में अपना मजबूत राजनीतिक आधार बनाने में सफल ...